नई दिल्ली, 20 मई 2026: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की पूर्व महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन को रॉयल सोसाइटी का फेलो चुना गया है। विज्ञान के क्षेत्र में इसे दुनिया के सर्वोच्च और सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है।
भारतीय विज्ञान के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर
यह उपलब्धि भारतीय विज्ञान के इतिहास में एक सुनहरे पन्ने की तरह है। डॉ. सौम्या स्वामीनाथन और उनके पिता, भारत रत्न प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन, भारत से ऐसी पहली पिता-पुत्री की जोड़ी बन गए हैं जिन्हें रॉयल सोसाइटी का फेलो चुना गया है।
डॉ. रघुनाथ माशेलकर ने साझा की जानकारी:
इस ऐतिहासिक गौरव की जानकारी वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के पूर्व महानिदेशक और भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रघुनाथ माशेलकर ने दुनिया के साथ साझा की।
वैश्विक स्वास्थ्य संकटों से निपटने में निभाई अहम भूमिका
सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) के क्षेत्र में विश्व स्तर पर सम्मानित विशेषज्ञ डॉ. स्वामीनाथन का योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने दशकों से विज्ञान और स्वास्थ्य सेवा नीति को मजबूत करने का काम किया है:
- टीबी और एचआईवी पर बड़ा काम: डॉ. स्वामीनाथन ने तपेदिक (TB) और HIV जैसे गंभीर रोगों पर गहन अनुसंधान और नीतियां बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- COVID-19 महामारी के दौरान नेतृत्व: कोरोना काल के वैश्विक संकट के दौरान WHO की मुख्य वैज्ञानिक के रूप में उनकी भूमिका ने उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनिया की सबसे भरोसेमंद आवाजों में से एक बनाया।
निष्कर्ष: वैश्विक मंच पर बढ़ता भारत का कद
रॉयल सोसाइटी में डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का चुना जाना न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण का प्रमाण है, बल्कि वैश्विक अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा नेतृत्व में भारत के बढ़ते योगदान के लिए भी एक गौरवपूर्ण क्षण है। पिता-पुत्री की इस जोड़ी ने आज हर भारतीय का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है।
(साभार: नवभारतटाइम्स.कॉम / वरुण शैलेश)
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