दरभंगा, 05 जून 2026।
अलीनगर महोत्सव-2026 से ठीक पहले एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा छेड़ दी है। जिस व्यक्ति को अलीनगर में अखिल भारतीय मुशायरा और कवि सम्मेलन आयोजित कराने के विचार का प्रमुख सूत्रधार माना जाता है, वही सैयद चमन सोनू अब इस आयोजन से पूरी तरह अलग हो गए हैं।
जानकारों के अनुसार, अलीनगर में राष्ट्रीय स्तर का मुशायरा कराने का सुझाव सबसे पहले सैयद चमन सोनू ने ही दिया था। उन्होंने न केवल इस सांस्कृतिक आयोजन की परिकल्पना की, बल्कि इसके लिए लगातार प्रयास भी किए। स्थानीय स्तर पर लोगों को जोड़ने, आयोजन की रूपरेखा तैयार करने और इसे एक बड़े मंच के रूप में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
हालांकि आयोजन से ठीक पहले सैयद चमन सोनू ने मुशायरा समिति के सभी पदों से इस्तीफा देते हुए समिति के कुछ सदस्यों पर मनमानी, गुटबाजी और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, जिस आयोजन को उन्होंने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बनाने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया था, वह अब कुछ लोगों की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का केंद्र बन गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता और युवा नेता के रूप में पहचान रखने वाले सैयद चमन सोनू ने कहा कि उन्होंने हमेशा पारदर्शिता, सम्मान और सामूहिक निर्णय की भावना से काम किया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उन मूल्यों को दरकिनार किया जा रहा है। इसलिए उन्होंने अपने सिद्धांतों के साथ समझौता करने के बजाय पद छोड़ना उचित समझा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुशायरे की अवधारणा से लेकर उसके प्रचार-प्रसार और प्रारंभिक तैयारियों तक सैयद चमन सोनू की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में उनका आयोजन से अलग होना निश्चित रूप से एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि जिस व्यक्ति ने इस आयोजन की नींव रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, उसका इस तरह अलग हो जाना आयोजन समिति के अंदर गहरे मतभेदों की ओर संकेत करता है।
फिलहाल सैयद चमन सोनू और उनकी टीम ने स्पष्ट कर दिया है कि अब उनका या उनके संगठन का अलीनगर महोत्सव-2026 की वर्तमान मुशायरा समिति से कोई संबंध नहीं है। उनके इस फैसले के बाद क्षेत्र में बहस छिड़ गई है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं जिनके कारण आयोजन के प्रमुख सूत्रधार को ही पीछे हटना पड़ा।